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21 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपी मुंबई से गिरफ्तार

Ratna Netam
4 Oct 2026 4:31 PM IST
21 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोपी मुंबई से गिरफ्तार
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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने सरकारी दस्तावेजों में कथित हेराफेरी और करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में वांछित एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कुशल समीर मेहता के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक मेहता दिल्ली में दर्ज दो बड़े मामलों से जुड़ा है, जिनमें केंद्रीय मंत्रालयों, अदालतों और वित्तीय संस्थानों के कथित जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। इन मामलों में धोखाधड़ी और धोखाधड़ी की कोशिश की कुल रकम 21 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
दिल्ली पुलिस की EOW ने आरोपी को पकड़ने के लिए अंतर-राज्यीय स्तर पर अभियान चलाया। पुलिस के अनुसार लगातार तलाश के बाद आरोपी की लोकेशन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसके आधार पर टीम ने कार्रवाई की। आखिरकार 1 अक्टूबर को मुंबई के बोरीवली रेलवे स्टेशन से कुशल समीर मेहता को पकड़ लिया गया।
पुलिस का कहना है कि मेहता लंबे समय से वांछित था और उसकी तलाश की जा रही थी। आरोपी के दूसरे राज्य में मौजूद होने की जानकारी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने स्थानीय स्तर पर सूचनाएं जुटाईं और उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। बोरीवली रेलवे स्टेशन पर उसकी मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद पुलिस टीम ने उसे पकड़ लिया।
EOW के अनुसार आरोपी का संबंध दिल्ली में दर्ज दो प्रमुख धोखाधड़ी के मामलों से है। आरोप है कि इन मामलों में ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें केंद्रीय मंत्रालयों, अदालतों और वित्तीय संस्थानों से जारी दिखाया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन दस्तावेजों के जरिए संबंधित लोगों और संस्थानों को भरोसे में लेकर बड़ी रकम की धोखाधड़ी करने या ऐसा प्रयास करने की साजिश रची गई।
दोनों मामलों में रकम का आंकड़ा 21 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया गया है। इतनी बड़ी राशि से जुड़े मामले होने के कारण EOW ने जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाया और आरोपी की तलाश के लिए अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की। अब गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी आरोपी से पूछताछ कर पूरे कथित नेटवर्क और दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को सामने लाने का प्रयास करेगी।
सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़े मामले जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे मामलों में कथित तौर पर दस्तावेजों को इस तरह तैयार किया जाता है कि पहली नजर में वे वास्तविक दिखाई दें। सरकारी विभागों की मुहर, लेटरहेड, आदेश, प्रमाण पत्र या अन्य आधिकारिक दस्तावेजों की नकल करके सामने वाले व्यक्ति या संस्था का भरोसा जीतने की कोशिश की जा सकती है।
इस मामले में भी आरोप है कि केंद्रीय मंत्रालयों और अदालतों से संबंधित कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। वित्तीय संस्थानों से जुड़े दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का पहलू भी जांच के दायरे में है। हालांकि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इन दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला और उनके इस्तेमाल के तरीके को लेकर विस्तृत जांच की जा रही है।
EOW अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित फर्जी दस्तावेज कहां और किस तरह तैयार किए गए थे। यह भी जांच का विषय होगा कि इन दस्तावेजों को तैयार करने में आरोपी अकेला शामिल था या उसके साथ अन्य लोगों का भी नेटवर्क काम कर रहा था। यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
इसके अलावा पुलिस के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी होगा कि जिन दस्तावेजों का कथित रूप से इस्तेमाल किया गया, वे किन-किन संस्थानों या व्यक्तियों के सामने पेश किए गए थे। जांच में डिजिटल उपकरण, बैंकिंग रिकॉर्ड, लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा सकती है।
आरोपी को मुंबई के बोरीवली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया जाना इस कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिल्ली में दर्ज मामलों के आरोपी की तलाश दूसरे राज्य तक पहुंचने के बाद EOW को अंतर-राज्यीय स्तर पर ऑपरेशन चलाना पड़ा। पुलिस ने आरोपी की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने के बाद कार्रवाई की और उसे पकड़ लिया।
बोरीवली रेलवे स्टेशन मुंबई के व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही के बीच किसी वांछित आरोपी को पकड़ने के लिए उसकी पहचान और लोकेशन की सटीक जानकारी महत्वपूर्ण होती है। पुलिस का दावा है कि ऑपरेशन के दौरान आरोपी को सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया।
दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग मुख्य रूप से आर्थिक अपराधों, बड़े वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों और जटिल आर्थिक लेनदेन से जुड़े अपराधों की जांच करती है। ऐसे मामलों में दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि आर्थिक अपराधों में लेनदेन की कड़ियां कई व्यक्तियों और स्थानों तक फैली हो सकती हैं।
कुशल समीर मेहता की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का फोकस कथित धोखाधड़ी की पूरी कार्यप्रणाली समझने पर रहेगा। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि सरकारी और न्यायिक संस्थानों से जुड़े बताए जा रहे दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इनके जरिए कितनी रकम वास्तव में हासिल की गई या हासिल करने की कोशिश की गई।
21 करोड़ रुपये से अधिक की रकम से जुड़े दोनों मामलों में जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन की कड़ियां भी खंगाली जा सकती हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि रकम कहां से आई, किस खाते में गई और इसके बाद उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
इसके साथ ही आरोपी के पुराने रिकॉर्ड और उससे जुड़े संपर्कों की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है। आर्थिक अपराधों के मामलों में अक्सर जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, ईमेल, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक खातों से मिली जानकारी के आधार पर नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश करती हैं।
फिलहाल कुशल समीर मेहता को गिरफ्तार किए जाने के बाद EOW की जांच जारी है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। पुलिस अब दिल्ली में दर्ज दोनों मामलों से जुड़ी कड़ियों को जोड़ने और कथित फर्जी दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इस गिरफ्तारी को EOW के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, क्योंकि मामला केंद्रीय मंत्रालयों, अदालतों और वित्तीय संस्थानों के कथित जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ा है। अब आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि 21 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी या उसके प्रयास के पीछे पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
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